Friday, June 6, 2014

करेला और उसके गुण ...जरुर पढ़िए

करेला और उसके गुण ...जरुर पढ़िए



करेला एक लता है जिसके फलों की सब्जी बनती है।
इसका स्वाद कड़वा होता है। 
करेला गर्मी और बरसात के महीनों में होता है। करेला लगभग पूरे भारत में उगाए जाते हैं। इसकी बेल (लता) को करेली और फल को करेला कहा जाता है। करेले के फूल पीले रंग के होते हैं और फल हरे रंग के होते हैं। करेले दो प्रकार के होते हैं- बड़ा करेला और छोटा करेला। करेले की खेती की जाती है। सब्जी के रूप में लम्बे करेले का प्रयोग अधिक किया जाता है। जंगली करेले की बेल अपने आप उगती है और झाड़ियों पर फैल जाती है और इसमें गोल-गोल फल लगते हैं जिसे बाड़ करेला कहते हैं। इसकी भी सब्जी बनाकर खाई जाती है। लम्बे करेले के अपेक्षा बाड़ करेला अधिक कडुवा होता है। सब्जी बनाते समय करेले को छिलके को छीलकर उतार देते हैं। करेले की कड़वाहट कम करने के लिए सब्जी में नमकनींबूमसाले आदि मिलाए जाते हैं।
करेले का स्वाद भले ही कड़वा हो परंतु हमारे स्वास्थ्य एवं सौंदर्य दोनों के लिए बहुत लाभकारी है।
कड़वा होने के कारण आप भले ही इसे न खाएँ परंतु यह पोषक गुणों से  भरपूर होता है।

यह भूख को बढ़ाकर हमारी पाचन शक्ति सुधारता है। यह पचने में हल्का है। शीतल होने के कारण गर्मी से उत्पन्न विकारों पर शीघ्र लाभ करता है। करेला बुखार, खाँसी, त्वचा के विकार, एनीमिया, प्रमेह तथा पेट के कीड़ों का नाशक है।
करेले में 6 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 15 ग्राम प्रोटीन,20 मिलीग्राम कैल्शियम, 70 मिलीग्राम
फास्फोरस,18 मिलीग्राम , लोह तत्व, विटामिन ए, विटामिन-सी के अलावा  इसमें गंधयुक्त वाष्पशील तेल, केरोटीन, ग्लूकोसाइड, सेपोनिन, एल्केलाइड एवं बिटर्स पाए जाते हैं।
इन सभी पौषक तत्वों के कारण करेला केवल सब्जी न होकर औषधि का काम भी करता है।
इसके औषधीय गुण इस प्रकार हैं।
1- करेला मधुमेह में रामबाण औषधि का कार्य करता है, छाया में सुखाए हुए करेला का एक चम्मच पावडर प्रतिदिन सेवन करने से डायबिटीज में चमत्कारिक लाभ मिलता है। क्योंकि करेला पेंक्रियाज को उत्तेजित कर इंसुलिन के स्रावण को बढ़ाता है।

2- बिटर्स एवं एल्केलाइड की उपस्थिति के कारण इसमें रक्तशोधक गुण पाए जाते हैं।
इसका प्रयोग करने से फोड़े-फुंसी एवं चर्मरोग नहीं होते।

3- करेले के बीज में विरेचक-तेल पाया जाता है। जिसके कारण करेले की सब्जी खाने से कब्ज नहीं होता। वहीं इसके सेवन से एसिडिटी, खट्टी डकारों में आराम मिलता है।

4- विटामिन ए की उपस्थिति के कारण इसकी सब्जी खाने से रतौंधी रोग नहीं होता है।

5- जोड़ों के दर्द में करेले की सब्जी का सेवन व जोड़ों पर करेले के पत्तों का रस लगाने से आराम मिलता है।
6- करेले के तीन बीज और तीन कालीमिर्च को पत्थर पर पानी के साथ घिसकर बच्चों को पिलाने से उल्टी-दस्त बंद होते हैं।
 7- करेले के पत्तों को सेंककर सेंधा नमक मिलाकर खाने से अम्लपित्त के रोगियों को भोजन से पहले होने वाली उल्टी बंद होती है। 
8- इसके फल या पत्ते का रस एक चम्मच शकर मिलाकर पिलाने से खूनी बवासीर में बड़ा लाभ होता है।
9- करेले के टुकड़ों को छाया में सुखाकर, पीसकर महीन चूर्ण बना लें। छः ग्राम चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह के रोगी को लाभ मिलेगा। 
10- करेले के पत्तों के रस पचास मि.ली. में थोड़ी-सी हींग मिलाकर पिलाने से पेशाब खुलकर आता है। 
11- इसके पत्तों को पत्थर पर घिसकर चटनी जैसा बनाकर लेप लगाने से त्वचा के रोग मिटते हैं और इसी लेप से, आग से जल जाने पर उत्पन्न व्रण भी ठीक हो जाते हैं।
12-गुर्दे या मूत्राशय की पथरी से पीड़ित रोगी को 2 करेले का रस प्रतिदिन पीना चाहिए और इसकी सब्जी खाना चाहिए। इससे पथरी गलकर पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है।  
13-करेले के 20 ग्राम रस में शहद मिलाकर कुछ दिनों तक पीने से पथरी गल जाती है और पेशाब के रास्ते निकल जाती है।   
करेले का रस और 1 नींबू का रस मिलाकर सुबह सेवन करने से शरीर की चर्बी कम होती है और मोटापा कम होता है।

प्रेम

कबीर दास जी कहते हैं...

प्रेम न बारी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय। 
राजा परजा जेहि रूचै, सीस देइ लै जाय॥ 

प्रेम न तो खेत या बाड़े में उगता है और न ही हाट में बिकता है। चाहे राजा हो या प्रजा, जिसको सच्चा प्रेम चाहिए उसे अपना शीश तक देना पड़ता है क्योंकि किंचितमात्र अभिमान रखकर प्रेम नहीं किया जा सकता। 

प्रेम पियाला जो पिए, सीस दक्षिना देय। 
लोभी सीस न दे सके, नाम प्रेम का लेय॥

जिसको सच्चे प्रेम का रस चखना है, उसको अपने शीश को दक्षिणा में देना पड़ता है अर्थात उसे अभिमान का त्याग करना होता है। किंतु जो यह नहीं कर सकता और प्रेम का नाम लेता है, वह तो लोभी है जिसके अंदर त्याग की भावना नहीं हो सकती।

प्रेम भाव एक चाहिए, भेष अनेक बनाय। 
चाहे घर में बास कर, चाहे बन को जाय॥

अपने अंदर प्रेम का भाव एक ही होना चाहिए, चाहे उसे आप जैसे भी दिखाएँ। कबीर दास जी भगवान् राम और भरत के प्रेम की ओर संकेत करके कहते हैं कि दोनों का प्रेम एक ही समान और अतुलनीय था। एक ने पिता के प्रति अपने प्रेम को वन जाकर निभाया था और दूसरे ने अपने भाई के प्रति प्रेम को राजमहल में सिंघासन पर खडाऊ रखकर निभाया था। 

जे घट प्रेम न संचरै, ते घट जान समान।
जैसे खाल लुहार की, सांस लेत बिनु प्रान॥ 

जिसके हृदय में प्रेम नहीं है, वह जीव शमशान के सदृश्य भयानक एवं त्याज्य होता है। जिस प्रकार लुहार की धौंकनी के भरी हुई खाल बग़ैर प्राण के सांस लेती है उसी प्रकार वह जीव भी प्रेम के बिना मृत के समान शमशान स्वरुप होता है।

जल में बसै कमोदिनी, चंदा बसै अकास। 
जो है जाको भावना, सो ताही के पास॥

जैसे कमल जल में खिलता है, चंद्रमा आकाश में रहता है। इस दुनिया की भी यही रीति है कि जिसको जो भाता है, वह उसी के पास रहता है।

भक्ति भाव भादों नदी, सबै चलीं घहराय। 
सरिता सोइ सराहिये, जो जेठ मास ठहराय॥

वैसे तो भक्ति, भावना और वर्षा ऋतु (भादों) की नदी सभी घहरे दिखते हैं। लेकिन सराहना उसी की करनी चाहिए जो विपत्ति में भी साथ दे, जैसे नदी वही सराहनीय है जो गर्मी की ऋतु में भी जल देती है। 

जिन ढूँढ़ा तिन पाइयाँ, गहिरे पानी पैठ। 
जो बौरा डूबन डरा, रहा किनारे बैठ॥

जिसने सच्चे प्रेम को ढूँढा, उसको वह मिल गया। लेकिन इसके लिए प्रेम की अनजान गहराइयों में उतरना पड़ता है। जो पागल इन गहराइयों में डूबने से डर गया, उसको प्रेम नहीं मिलता क्योंकि वह छिछले धरातल (किनारे) पर ही बैठा रह गया। 

कहते हैं, हर रचना में अर्थ पर पाठक का अधिकार होता है, न कि कवि का। वही दुस्साहस करके मैंने इन दोहों के अर्थ लिखे हैं। त्रुटियों को क्षमा करें और आवश्यकतानुरूप सुझाएँ।

करेला benefits

करेला -

करेला के गुणों से सब परिचित हैं |
मधुमेह के रोगी विशेषतः इसके रस और सब्जी का सेवन करते हैं | समस्त भारत में इसकी खेती की जाती है | इसके पुष्प चमकीले पीले रंग के होते हैं | इसके फल ५-२५ सेमी लम्बे,५ सेमी व्यास के,हरे रंग के,बीच में मोटे,सिरों पर नुकीले,कच्ची अवस्था में हरे तथा पक्वावस्था में पीले वर्ण के होते हैं | इसके बीज ८-१३ मिमी लम्बे,चपटे तथा दोनों पृष्ठों पर खुरदुरे होते हैं जो पकने पर लाल हो जाते हैं | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जून से अक्टूबर तक होता है | आज हम आपको करेले के कुछ औषधीय प्रयोगों से अवगत कराएंगे -

करेला लाभदायक



खाली पेट करेले का रस का सेवन करने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है। 
करेला कफ,वायु,बुखार,कृमि,पित्त,रक्तदोष आदि को ठीक रखने में सहायता करता है। 
करेले का निकला हुआ रस पीने से पेट के रोगों में लाभ होता है। 
करेले का रस रक्त को शुद्ध करता है। 
करेले का सेवन कब्ज एवं मूत्र सम्बन्धित विकारों में लाभदायक है।
मधुमेय में करेले का सेवन रामबाण सिद्ध होता है।

१- करेले के ताजे फलों अथवा पत्तों को कूटकर रस निकालकर गुनगुना करके १-२ बूँद कान में डालने से कान-दर्द लाभ होता है |
२- करेले के रस में सुहागा की खील मिलाकर लगाने से मुँह के छाले मिटते हैं |
३-सूखे करेले को सिरके में पीसकर गर्म करके लेप करने से कंठ की सूजन मिटती है ।
४- १०-१२ मिली करेला पत्र स्वरस पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं |
५- करेला के फलों को छाया शुष्क कर महीन चूर्ण बनाकर रखें | ३-६ ग्राम की मात्रा में जल या शहद के साथ सेवन करना चाहिए | मधुमेह में यह उत्तम कार्य करता है | यह अग्नाशय को उत्तेजित कर इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाता है |
६- १०-१५ मिली करेला फल स्वरस या पत्र स्वरस में राई और नमक बुरक कर पिलाने से गठिया में लाभ होता है |
७- करेला पत्र स्वरस को दाद पर लगाने से लाभ होता है | इसे पैरों के तलवों पर लेप करने से दाह का शमन होता है|
८- करेले के १०-१५ मिली रस में जीरे का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार पिलाने से शीत-ज्वर में लाभ होता है |

सोलन। करेला केवल कड़वी सब्जी नहीं, बल्कि अब यह स्वास्थ्य एवं धन अर्जन का साधन भी बन गया है। शुगर रोगियों के लिए यह दवा से कम नहीं है और अब तो रोगी इसकी वाइन भी पी सकेंगे। नौणी विश्वविद्यालय के वैनिकों ने करेले से वाइन तैयार करने में सफलता हासिल कर ली है। इससे अब करेले की मांग भी बढ़ेगी व किसानों को ज्यादा फायदा भी मिलेगा।
वैसे तो फलों से तैयार होने वाली वाइन में स्वास्थ्य का खजाना छिपा होता है, लेकिन इसमें शुगर की मात्र अधिक होने के कारण मधुमेह के रोगी इसे नहीं ले सकते। अब यदि करेले से वाइन तैयार होती है तो शुगर रोगी भी इसकी चुस्कियां ले सकेंगे। वैज्ञानिकों ने करेले के कसैले स्वाद को कम करने के लिए इसके जूस को एप्पल व अंगूर के जूस के साथ फर्मेंटेशन किया, जिससे इसमें अच्छा स्वाद आया। इसमें अढ़ाई से तीन फीसद ही अल्कोहल होता है। यह वाइन को शुगर रोगी के लिए स्वाद व सेहत से लबरेज होगी।
डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विवि के फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के एमएससी छात्र नवीन कुमार ने बताया कि करेला शुगर के रोगियों के लिए रामबाण का काम करता है। इसलिए उन्होंने शुगर रोगियों के लिए वाइन तैयार करने की दिशा में कार्य आरंभ किया।
1986 से हो रहा फ्रूट वाइन पर शोध हिमाचल में फलों की पैदावार के चलते फ्रूट वाइन पर नौणी विवि में 1986 से फ्रूट वाइन पर शोध कार्य चल रहा है। यहां प्रदेश में पाए जाने वाले फल सेब, आड़, प्लम, जंगली खुमानी, स्ट्राबेरी, नाशपाती से फ्रूट वाइन तैयार की है। इसके अलावा बरमूथ व एप्पल से साइडर विनेगर भी यूनिवर्सिटी के वैनिकों ने तैयार किया है। फ्रूट वाइन में विटामिन, मिनरल, शुगर पाई जाती है, जिसके कारण यह हृदय के रोगियों के लिए लाभकारी है। यह बॉडी में लियोप्रोटीन के घनत्व को बढ़ाता है और एंथ्रोजैनिक एपोप्रोटीन की मात्र को कम करता है। इसके अलावा वाइन में फिलोलिक तत्व पाए जाते हैं, जो इसके महत्व को बढ़ाते हैं। करेले के जूस को हृदय संबंधी रोग के लिए भी अच्छा बताया जाता है।
पढ़े : डायबिटीज के इलाज की जगी अब नई उम्मीद



गहरी नींद के आसान उपाय......

गहरी नींद के आसान उपाय........

* रात्रि भोजन करने के बाद पन्द्रह से बीस मिनट धीमी चाल से सैर कर लेने के बाद ही बिस्तर पर जाने की आदत बना लेनी चाहिए। इससे अच्छी नींद के अलावा पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है।

* अगर तनाव की वजह से नींद नहीं आ रही हो या फिर मन में घबराहट सी हो तब अपना मन पसंद संगीत सुनें या फिर अच्छा साहित्य या स्वास्थ्य से संबंधित पुस्तकें पढ़ें, ऐसा करने से मन में शांति का भाव आएगा, जो गहरी नींद में काफी सहायक होता है।

* अनिद्रा के रोगी को अपने हाथ-पैर मुँह स्वच्छ जल से धोकर बिस्तर पर जाना जाहिए। इससे नींद आने में कठिनाई नहीं होगी। एक खास बात यह कि बाजार में मिलने वाले सुगंधित तेलों का प्रयोग नींद लाने के लिए नहीं करें, नहीं तो यह आपकी आदत में शामिल हो जाएगा।


* सोते समय दिनभर का घटनाक्रम भूल जाएँ। अगले दिन के कार्यक्रम के बारे में भी कुछ न सोचें। सारी बातें सुबह तक के लिए छोड़ दें। दिनचर्या के बारे में सोचने से मस्तिष्क में तनाव भर जाता है, जिस कारण नींद नहीं आती।


* अपना पलंग मन-मुताबिक ही चुनें और जिस मुद्रा में आपको सोने में आराम महसूस होता हो, उसी मुद्रा में पहले सोने की कोशिश करें। अनचाही मुद्रा में सोने से शरीर की थकावट बनी रहती है, जो नींद में बाधा उत्पन्न करती है।


* अगर अनिद्रा की समस्या पुरानी और गंभीर है, नींद की गोलियाँ खाने की आदत बनी हुई है तो किसी योग चिकित्सक की सलाह लेकर शवासन का अभ्यास करें और रात को सोते वक्त शवासन करें। इससे पूरे शरीर की माँसपेशियों का तनाव निकल जाता है और मस्तिष्क को आराम मिलता है, जिस कारण आसानी से नींद आ जाती है।


* अच्छी नींद के लिए कमरे का हवादार होना भी जरूरी है। अगर मौसम बाहर सोने के अनुकूल है तो छत पर या बाहर सोने को प्राथमिकता दें। कमरे में कूलर-पँखा या फिर एयर कंडीशनर का शोर ज्यादा रहता है, तो इनकी भी मरम्मत करवा लेनी चाहिए, क्योंकि शोर से मस्तिष्क उत्तेजित रहता है, जिस कारण निद्रा में बाधा पड़ जाती है।

* सोने से पहले चाय-कॉफी या अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करें। इससे मस्तिष्क की शिराएँ उत्तेजित हो जाती हैं, जो कि गहरी नींद आने में बाधक होती हैं।

ज्वार ----

ज्वार ----


गेहूं की रोटी का बेहतर विकल्प है मोटे अनाज में ज्वार की रोटी। यह पोटेशियम और फास्फोरस के साथ ही कैल्शियम और आयरन से भरपूर है। यह वजन बढ़ने और हृदय विकार जैसे आर्टरीज में होने वाले ब्लॉकेज को रोकने में मददगार है।गर्मियों में ज्वार की रोटी , छाछ या कढी के साथ या साग के साथ सेवन करने से ठंडक देती है. तो हो जाए ज्वारी रोटी !!!!!!
ज्वार बहुत पौष्टिक होता है। इसमें बहुत ज्यादा फाइबर है। यह आटे की तरह लसलसा नहीं होता, जिससे यह डायबिटीज, आर्थराइटिस जैसी बीमारियों से बचाव में मदद देता है। यह हड्डियों और दांतों को भी मजबूत बनाता है।
ज्वार बवासीर और घावों में लाभदायक है। ज्वार की रोटी नित्य छाछ में भिगोकर खाएँ। शरीर बलवान होता है।
यह आटा गेहूं के आटे से कई गुना बेहतर होता है। ज्वार के आटे में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। यह ग्लुटेन रहित और नॉन एलर्जिक होता है। यह फाइबर, फॉस्फोरस और आयरन का भंडार है। इसमें अल्कालाइन नहीं होता, जिससे यह आसानी से पच जाता है। ज्वार विटमिन बी कॉम्प्लेक्स का अच्छा स्त्रोत है। शाकाहारी लोगों के लिए ज्वार का आटा प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है। शोध बताते हैं कि यह कुछ खास प्रकार के कैंसर के खतरों को भी कम करता है। साथ ही यह हृदय और मधुमेह रोगियों के लिए आटे का अच्छा विकल्प है।

सहजन -आलू

सहजन -
दक्षिण भारत में साल भर फली देने वाले पेड़ होते है. इसे सांबर में डाला जाता है . वहीँ उत्तर भारत में यह साल में एक बार ही फली देता है. सर्दियां जाने के बाद इसके फूलों की भी सब्जी बना कर खाई जाती है. फिर इसकी नर्म फलियों की सब्जी बनाई जाती है. इसके बाद इसके पेड़ों की छटाई कर दी जाती है. 
- आयुर्वेद में ३०० रोगों का सहजन से उपचार बताया गया है। इसकी फली, हरी पत्तियों व सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर
मात्रा में पाया जाता है।
- इसके फूल उदर रोगों व कफ रोगों में, इसकी फली वात व उदरशूल में, पत्ती नेत्ररोग, मोच, शियाटिका,गठिया आदि में उपयोगी है|
- जड़ दमा, जलोधर, पथरी,प्लीहा रोग आदि के लिए उपयोगी है तथा छाल का उपयोग शियाटिका ,गठिया, यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयष्कर है|
- सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर,वातघ्न,रुचिकारक, वेदनाशक,पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है|
- सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात, व कफ रोग शांत हो जाते है| इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया,शियाटिका ,पक्षाघात,वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है| शियाटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है,
- मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है |
- सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व बहत्तर प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है|
- इसकी सब्जी खाने से पुराने गठिया , जोड़ों के दर्द, वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है.
- सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है.
- सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है.
- इसकी जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पिने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है.
- इसके पत्तों का रस बच्चों के पेट के किडें निकालता है और उलटी दस्त भी रोकता है.
- इसका रस सुबह शाम पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है.
- इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे धीरे कम होने लगता है.
- इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़ें नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है.
- इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है.
- इसकी जड़ का काढे को सेंधा नमक और हिंग के साथ पिने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है.
- इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है.
- सर दर्द में इसके पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे.
- इसमें दूध की तुलना में ४ गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है।
- सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीस कर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लैरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है जिससे जीवविज्ञान के नजरिए से मानवीय उपभोग के लिए अधिक योग्य बन जाता है।
- कैन्सर व पेट आदि शरीर के आभ्यान्तर में उत्पन्न गांठ, फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द), जोड़ो में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी आदि में लाभकारी है।
- सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है।
- आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से विषाणु जनित रोग चेचक के होने का खतरा टल जाता है।
- सहजन में हाई मात्रा में ओलिक एसिड होता है जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिये अति आवश्यक है।
- सहजन में विटामिन सी की मात्रा बहुत होती है। विटामिन सी शीर के कई रोगों से लड़ता है, खासतौर पर सर्दी जुखाम से। अगर सर्दी की वजह से नाक कान बंद हो चुके हैं तो, आप सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी।
- इसमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आइरन, मैग्नीशियम और सीलियम होता है।
- इसका जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है।
- सहजन में विटामिन ए होता है जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिये प्रयोग किया आता जा रहा है। इस हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढापा दूर रहता है। इससे आंखों की रौशनी भी अच्छी होती है।
- आप सहजन को सूप के रूप में पी सकते हैं, इससे शरीर का रक्त साफ होता है। पिंपल जैसी समस्याएं तभी सही होंगी जब खून अंदर से साफ होगा।
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आलू 

भारत और विश्व में आलू विख्यात है और अधिक उपजाया जाता है| आलू को हमेशा छिलके समेत पकाना चाहिए क्योंकि आलू का सबसे अधिक पौष्टिक भाग छिलके के एकदम नीचे होता है, जो प्रोटीन और खनिज से भरपूर होता है। आलू में स्टॉर्च, पोटाश और विटामिन ए व डी होता है।
यह अन्य सब्जियों के मुकाबले सस्ता मिलता है लेकिन है गुणों से भरपूर | आलू से मोटापा नहीं बढ़ता| आलू को तलकर तीखे मसाले, घी आदि लगाकर खाने से जो चिकनाई पेट में जाती है, वह चिकनाई मोटापा बढ़ाती है| आलू को उबालकर अथवा गर्म रेत या राख में भूनकर खाना लाभदायक और निरापद है|
आलू में विटामिन बहुत होता है| आलू को छिलके सहित गरम राख में भूनकर खाना सबसे अधिक गुणकारी है|

-भुना हुआ आलू पुरानी कब्ज और अंतड़ियों की सड़ांध दूर करता है| आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित्त को रोकता है|
-चार आलू सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक, मिर्च डालकर नित्य खाएं। इससे गठिया ठीक हो जाता है|
हरा भाग खतरनाक
आलू के हरे भाग में सोलेनाइन विषैला पदार्थ होता है, जो शरीर के लिए नुकसानदायक होता है। आलू के अंकुरित हिस्से का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए।

आलुओं में प्रोटीन होता है, सूखे आलू में 8.5 प्रतिशत प्रोटीन होता है| आलू का प्रोटीन बूढ़ों के लिए बहुत ही शक्ति देने वाला और बुढ़ापे की कमजोरी दूर करने वाला होता है|
आलू में कैल्शियम, लोहा, विटामिन-बी तथा फास्फोरस बहुतायत में होता है| आलू खाते रहने से रक्त वाहिनियां बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती हैं तथा कठोर नहीं होने पातीं|
इसको छिलके सहित पानी में उबालें और गल जाने पर खाएं।
यदि दो-तीन आलू उबालकर छिलके सहित थोड़े से दही के साथ खा लिए जाएं तो ये एक संपूर्ण आहार का काम करते हैं|
आलू के छिलके ज्यादातर फेंक दिए जाते हैं, जबकि अच्छी तरफ साफ़ किये छिलके सहित आलू खाने से ज्यादा शक्ति मिलती है|
- कभी-कभी चोट लगने पर नील पड़ जाती है। नील पड़ी जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाएँ|
- शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है।|
-गुर्दे की पथरी में केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है| पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियाँ और रेत आसानी से निकल जाती हैं|
-उच्च रक्तचाप के रोगी भी आलू खाएँ तो रक्तचाप को सामान्य बनाने में लाभ करता है|
-आलू को पीसकर त्वचा पर मलें। रंग गोरा हो जाएगा|

Cheddar and Ale Tilapia - Easy

Cheddar and Ale Tilapia - Easy

I forgot to photograph fish after baking ...














Here is a dairy fish dish that is fast and easy ... perfect for a week night.  

Takes longer to preheat oven than to bake dinner.  
And the fish reheats beautifully if/when you cart leftovers to work the next day.

If you have ever made cheddar cheese soup or did the fondue thing, most of the ingredients will look familiar.  

I was trying to capture the smoky cheesy flavor of both without having to use a spoon.  
Or a fondue spear.
.... so these were taken at work next day with cell phone.














I prefer dark ale or beer in this recipe because it holds its own against the flavorful cheddar and Worcestershire sauce. 

 The ale is poured over the fish to give the coating mixture something to help it adhere better. 
 As you will quickly discover, most of the ale will then spill off the fish 
(so a rimmed pan is kinda required), but this is a good thing.  The fish poaches in the ale,
 giving it even more flavor.  The amount of cayenne is juuuuust enough to give a 
tiny tingle of flavor, not to hurt. But it you're the type who thinks cinnamon is spicy, simply omit it.  
The mustard will zing enough.

Cheddar and Ale Tilapia - Easy
This recipe has been entered in Your Best Recipe with Beer contest at Food52.  
Serves 4

1/2 cup shredded sharp cheddar cheese
1/2 tsp. dry mustard
Dash cayenne (optional)
1 tsp. Worcestershire sauce
1 Tbl. butter
4 tilapia fillets (about 1 lb.)
2 Tbl. additional butter, melted
1/2 cup dark ale or beer

Preheat oven to 400F.  Combine cheese, dry mustard, cayenne (if using) and Worcestershire

 sauce in a small mixing bowl.  Set aside.











Grease a medium-sized rimmed baking pan with the one tablespoon of butter. 

 Place fillets in baking pan in a single layer.  Pour ale or beer over fish. 
 Sprinkle cheese mixture evenly over fish. Drizzle the 2 tablespoons of melted butter
 evenly over cheese mixture.
Place in preheated oven and bake for 10-15 minutes, or until cheese melts, 
coating browns and fish is opaque and cooked through.  If the fish is cooked but the 
cheese still needs a bit of browning, place under the broiler for a minute or two, 
watching carefully so that it does not burn.
Paper plate was left over from co-worker's baby shower.

















Pasta Chips Review - Guest Post

On an otherwise ordinary day in the The Oh! You Cook! household,  a rather large box magically appeared on our doorstep, courtesy of UPS and Vintage Italia.  Mostly consisting of padding, the box finally yielded its true contents:  6 bags containing 5 different kinds of  Pasta Chips!  These potatoless chips are different than your regular ol' chip-type snack. 
They are made from semolina flour,  and (according to the package) half the fat.  theHubby immediately tore into the Garlic Olive Oil version.  He declared it "meh."  I tried a chip and rather liked it.  It has a strong flavor of garlic, so avoid pairing with anything mild because the only thing you will taste is the chip.  BTW, despite theHubby's less than stellar review, he polished off the entire bag.


youngerSon came back from college, so I handed the rest of the chips to him for a more professional review (did I mention that he is a paid film and tv critic?  Check out his latest review along with his new own blog):

I’m not really a “Foodie”, as is the modern colloquialism. I am, according to my parents at least, a vacuum. Taste is only as much of a concern as the speed with which I can slide the contents of my plate down my gizzard. Or, maybe some understanding and appreciation of flavor is what allows me to scarf down what’s put in front of me, and gluttony only serves as a manifestation of what I decide to be the appropriate food, and subsequently the appropriate portion. I guess that’s why I like buffets. In this case there is a little bit of irony to the situation, where I ate no more than two of any flavor of “Pasta Chip” while my Dad wolfed an entire bag before subsequently declaring it a solid “meh”. 

What we have here are essentially Pringles with a fancier name and a container which is mostly un-cylindrical. The chip itself is folded to resemble something akin to lasagna, but to me it just looks like a comically large stamp. The bags are colored largely in light pastel colors, with flavors intended to resemble the different kinds of sauces one could theoretically put onto real pasta. Except for the sea salt, that’s just popular with the kids these days. Of course they can’t use the actual sauce so the chips are flavored with a powdered such and such that emulates the flavor as close as it can’t. Unfortunately, this isn’t the Jetsons. We don’t live in the sky, robots don’t clean our houses (with designs that reinforce stereotypical gender roles), and powder can’t accurately recreate the taste of real food. That’s the main problem with these chips. 

As Pasta Chips, they are stuck between the fried stuff and the good stuff. They have to appear better than potato chips, but they also have to have more flavor than if you just stuck raw pasta into a puffy bag of air. As such, these things are incredibly unhealthy. Ridiculously so. Even for a chip. And they have to be that way for deciding to make a chip out of something with less flavor than a potato. They look like the healthy choice and they are not. 

I describe these as Pringles because of just how similar they wind up being in taste because of the powdered flavor and the sheer amount of fat in these chips. It’s not like I’d think they would taste anything like real pasta, but you’d expect some sort of flavor identifying it against other chips. Blindfolded I would only be able to identify these by texture, which is roughly what pasta would taste like if you didn’t cook it all the way. I assume you were a child at some point in your life. During that time a parent made spaghetti, and before they tipped the box into the boiling pot of water, you ate a raw strand of pasta. In case you haven’t (weirdo), just imagine eating crunchy pasta. It’s not that hard to figure these chips out. If they don’t sound very appetizing… they’re not. 

You can’t quite call a chip bad because it’s unhealthy. However, the labeling might make one think that these could be an alternative to saturated fats and oils. These aren’t good for you no matter which way you slice it. I mean, how many words can you really squeeze out of a bag of chips? A bag which is mostly air. I don’t mean that in the, “air pocket to prevent the chips being crushed in transport”, kind of air I mean there is surprisingly little substance to the chips and there are surprisingly few chips per bag. These are the chips for the hipster in your life. They paint themselves as something new and different yet are drawn from the exact same deposits that would turn you away from the chip aisle for fear of high cholesterol. As such I expect Whole Foods will start carrying them any day now. 


Full disclosure:Vintage Italia provided several bags of their pasta chips at no cost for us to test and review. We received no monetary compensation. All opinions expressed are our own.
 - See more at: http://ohyoucook.blogspot.in/2014/06/pasta-chips-review-guest-post.html#sthash.uOthINgJ.dpuf

कुंडली में ऐसे योग हैं तो व्यक्ति हो सकता है: गरीब :मालामाल :उपाय करें:Poor: rich :Remedy

कुंडली में ऐसे योग हैं तो व्यक्ति हो सकता है गरीब...
धर्म डेस्क. उज्जैन | 
कुंडली में ऐसे योग हैं तो व्यक्ति हो सकता है गरीब...
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य और शनि एक ही भाव में स्थित हो तो अधिकांशत: इसके बुरे प्रभाव ही झेलने पड़ते हैं।
- यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य और शनि लग्न में स्थित है तो वह व्यक्ति दुराचारी, बुरी आदतों वाला, मंदबुद्धि और पापी प्रवृत्ति का होता है।
- यदि शनि और सूर्य चतुर्थ भाव में है तो व्यक्ति नीच, दरिद्र और भाइयों तथा समाज में अपमानित होने वाला होता है।
- यदि सूर्य और शनि सप्तम भाव में स्थित है तो व्यक्ति आलसी, भाग्यहीन, स्त्री और धन से रहित, शिकार खेलने वाला और महामूर्ख होता है।
- यदि दशम भाव में यह दोनों ग्रह स्थित हो तो व्यक्ति विदेश में नौकरी करने वाला होता है। यदि इन्हें अपार धन की प्राप्ति भी हो जाए तो वह चोरी हो जाता है।
इन बुरे प्रभावों से बचने के उपाय
- प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में सूर्य हो जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें।
- प्रति मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।
- शनि और सूर्य से संबंधित वस्तुएं दान करें तथा ऐसी वस्तुएं कभी दान या उपहार में स्वीकार न करें।
- गरीबों को मदद करें।
- महिलाओं का सम्मान करें और पूर्णत: धार्मिक आचरण रखें।
- प्रतिदिन पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें।
- शिवलिंग पर प्रतिदिन जल चढ़ाकर विधि विधान से पूजा करें।
- हनुमान चालिसा का पाठ प्रतिदिन करें।

ऐसे लोग जरुर हो जाते हैं मालामाल, जिनकी कुंडली में हों ऐसे योग...
धर्म डेस्क. उज्जैन | ..
धन... पैसा... यह ऐसे शब्द हैं जिनके पीछे दुनिया भाग रही है। अमीर और अमीर बनना चाहते हैं जबकि गरीब थोड़ा पैसा कमाने के लिए भी दिनरात मेहनत करते हैं फिर भी भाग्य उनका साथ नहीं देता। कोई व्यक्ति गरीब क्यों होता है और किसी अमीर के पास कितना पैसा होगा? यह ज्योतिष शास्त्र से जाना जा सकता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली का दूसरा भाव धन या पैसों से संबंधित होता है। इसी द्वितीय भाव से व्यक्ति को धन, आकर्षण, खजाना, सोना, मोती, चांदी, हीरे, जवाहारात आदि मिलते हैं। साथ ही इसी से व्यक्ति को स्थायी संपत्ति जैसे घर, भवन-भूमि का कारक भी प्राप्त होता है।
- किसी की कुंडली में द्वितीय भाव पर शुभ ग्रह या शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो उस व्यक्ति के अमीर बनने में कोई रूकावट नहीं होती है।
- यदि कुंडली में द्वितीय भाव में बुध हो तथा उस पर चंद्रमा की दृष्टि हो तो जातक धनहीन होता है, वह जीवनभर मेहनत करता रहता है परंतु उसे ज्यादा धन की प्राप्ति नहीं होती है। वह गरीब ही रहता है।
- यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में द्वितीय भाव पर किसी पाप ग्रह की दृष्टि हो तो वह धनहीन होता है।
यदि कुंडली के द्वितीय भाव में चंद्रमा हो तो अपार धन प्राप्ति का योग बनता है परंतु यदि उस पर नीच के बुध की दृष्टि पड़ जाए तो घर में भरा हुआ धन भी नष्ट हो जाता है।
- चंद्रमा यदि अकेला हो तथा कोई भी ग्रह उससे द्वितीय या द्वादश न हो तो व्यक्ति गरीब ही रहता है।
- यदि कुंडली में सूर्य, बुध द्वितीय भाव में स्थित हो तो धन स्थिर नहीं होता।
अधिक धन प्राप्ति के लिए यह उपाय करें:
- प्रतिदिन शिवलिंग पर जल, बिल्वपत्र और अक्षत (चावल) चढ़ाएं।
- महालक्ष्मी और श्री विष्णु की पूजा करें।
- सोमवार का व्रत करें।
- सोमवार को अनामिका उंगली में सोने, चांदी और तांबे से बनी अंगुठी पहनें।
- शाम को शिवजी के मंदिर में दीपक लगाएं।
- पूर्णिमा को चंद्र का पूजन करें।
- श्रीसूक्त का पाठ करें।
- श्री लक्ष्मीसूक्त का पाठ करें।
- कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
- किसी की बुराई करने से बचें।
- पूर्णत: धार्मिक आचरण बनाएं रखें।
- घर में साफ-सफाई बनाएं रखें इससे धन स्थाई रूप से आपके घर में रहेगा।
 क्या आपकी कुण्डली में हैं ऐसे धनयोग
इस संसार में अपवादों को छोड़कर हर व्यक्ति धनवान होना चाहता है। धन व्यक्ति को सुख, आनंद, सुविधा और सामाजिक सुरक्षा देता है। आज दुनिया में धनवान लोगों की संख्या इतनी कम है कि उनकी सूची बनाई जा सकती है। इसकी तुलना में गरीब लोगों की संख्या अधिक है। कुछ लोगों की आय इतनी है कि वह समाज में सम्मान और आदर्श जिंदगी जीते हैं। लेकिन तीनों ही वर्ग को देखें तो पाएंगे कि सभी में समान रू प से धन पाने की चाह होती है।
धन और आय के आधार पर लोगों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जा सकता है - अत्यधिक धनी, उच्च मध्यम वर्ग, मध्यम वर्ग, गरीब और बहुत गरीब। यह अंतर देखकर यह विचार आना स्वाभाविक है कि आखिर ऐसा क्यों है। जबकि सभी मानव समान है।
ऐसा भी नहीं है कि कोई व्यक्ति धन कमाने की पूरी कोशिश नहीं करता। जहां तक धन कमाने की बात है, हर व्यक्ति इच्छानुसार काम करने को स्वतंत्र होता है। यही कारण है कि कोई व्यक्ति ईमानदारी से धन प्राप्त करना चाहता है और कोई व्यक्ति धन के लिए अपराध का रास्ता चुन लेता है। धन कमाने के तरीकों के चुनाव के पीछे व्यक्ति के मानसिक विचारों का अंतर है। इसी अंतर को ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से जाना जा सकता है। व्यक्ति की जन्म कुण्डली में बनने वाले ग्रह योग से उसके अतीत और भविष्य में धनवान या धनहीन होने के कारणों को पहचाना जा सकता है।
धनयोग देखने के लिए जन्म कुण्डली का दूसरा, छठा और दसवां भाव महत्वपूर्ण होता है। इनके साथ ही ७ और ११ वां भाव के ग्रह योग भी देखे जाते हैं। जन्म कुंडली में दूसरा भाव खुद के द्वारा कमाए धन, छठा भाव ऋण से प्राप्त धन, और दसवां भाव नौकरी या रोजगार से कमाए धन का निर्धारक होता है।
धन के कारक ग्रह सूर्य और गुरु होते हैं। इसलिए सीधा सा नियम है कि जन्म कुण्डली में जब सूर्य और गुरु उच्च के हो और अच्छे भाव में बैठे हो तो वह व्यक्ति को धनवान बनाते हैं।
इसी प्रकार सूर्य और गुरु की उपस्थिति के आधार पर यदि दूसरे भाव के ग्रहयोग की स्थिति मजबूत होती है, तब पैतृक संपत्ति या निवेश द्वारा धन प्राप्त होता है।
जब छठा भाव दूसरे और दसवें भाव की तुलना में मजबूत होता है, तब ब्याज द्वारा धन की प्राप्ति होती है।
अगर दसवां भाव दूसरे और छठा से मजबूत होता है, तब व्यक्ति का अनेक स्त्रोतों से धन प्राप्ति होती है।
जब बारहवां भाव मजबूत स्थिति में हो तो व्यक्ति उधार लिया धन चुका नहीं पाता और ऋणी हो जाता है।
धन योग के लिए एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि सूर्य का शत्रुग्रह शनि दूसरे भाव में न बैठा हो और न उसकी दृष्टि हो। इसके साथ ही लग्र से दूसरे भाव और चंद्र के साथ उसका योग न बनता हो।
 कुंडली से मिलते हैं भाग्यशाली होने के संकेत 
कुंडली से मिलते हैं भाग्यशाली होने के आर. एस. द्विवेदी प्रत्येक व्यक्ति अपना-अपना भाग्य लेकर जन्म लेता है। एक ही परिवार में जन्मे बच्¬चों की किस्मत भी अलग होती है। ऐसा जन्म के समय की ग्रह स्थितियों में भिन्नता के कारण होता है। जन्मकुंडली में कौन सी स्थितियां व्यक्ति को धनवान व भाग्यशाली बनाती हैं, जानने के लिए पढ़िए यह आलेख... स संसार में कुछ लोग अपने जीवन में जल्दी तरक्की कर जाते हैं जबकि कुछ लोगों को इसके लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है। कई बार इतना संघर्ष करने के बावजूद सफलता नहीं मिल पाती है। कुछ बहुत ही अमीर घर में पैदा होते हैं और कुछ लोग बहुत ही गरीब घर में। कुछ अमीर घर में पैदा होकर धीरे-धीरे गरीब हो जाते हैं और कुछ लोग गरीब घर में पैदा होकर धीरे-धीरे अमीर हो जाते हैं। कुछ लोग बहुत अच्छा पढ़ लिखकर बेरोजगार रहते हैं और कुछ लोग थोड़ा पढ़े लिखे होने पर भी अच्छे काम काज में लग जाते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि बच्चे के जन्म के बाद घर में बहुत तरक्की हुई और सब कुछ अच्छा हो गया जबकि कुछ लोग कहते हैं कि जब से बच्चा पैदा हुआ मां बाप बीमार रहते हैं और घर में परेशानी आ गई है। कुछ लोग कहते हैं कि शादी के बाद पत्नी के आने से तरक्की और उन्नति होती गई जबकि कुछ लोग कहते हैं कि शादी के बाद दिन प्रतिदिन काम खराब हो रहा है। इस संसार में अधि¬कतर लोग चढ़ते हुए सूर्य को नमस्¬कार करते हैं। अगर आप अच्छे पद पर हंै या आपको सब प्रकार की सुख सुविधा है तो आपके अनेक मित्र होंगे, अगर कुछ नहीं तो आपको कोई पूछने वाला नहीं होगा। ज्योतिष में नवम स्थान को भाग्य एवं धर्म स्थान माना जाता है। जन्मपत्री देखते समय सभी विषयों पर विस्तार पूर्वक विचार करना चाहिए। सबसे पहले लग्न को देखें, वह एक अंश से कम और 29 अंश से अधिक नहीं होना चाहिए। अगर लग्न कमजोर हो या संधि में हो तो कुंडली कमजोर होती है। लग्नेश के अस्त होने पर कुंडली में बहुत ही खराबी आ जाती है। ऐसे में ग्रह कितने भी अच्छे हों, कुछ न कुछ परेशानी बनी रहेगी। लग्नेश वक्री हो और अपने स्थान से छठे, आठवें या बारहवें, चला गया हो तो कंुंडली कमजोर होगी। ज्योतिष में गुरु, शुक्र, बुध और पक्षबली चंद्रमा को शुभ माना गया है। अगर ये ग्रह केंद्र या त्रिकोण में हों, तो कुंडली में अरिष्ट भंग करते हैं अर्थात अच्छा योग बनाते हैं। जन्मकुंडली में त्रिकोण स्थान 1, 5, 9 और केंद्र स्थान 1, 4, 7, 10 को अच्छा माना गया है लग्न। (प्रथम स्थान) को केंद्र और त्रिकोण दोनों माना गया है। जन्मकुंडली में आमदनी और धन के लिए दूसरा और ग्यारहवां स्थान दोनों अच्छे हंै, लेकिन तंदुरस्ती के लिए नहीं क्योंकि दूसरा स्थान मारक है और ग्यारहवां छठे से छठा है। जन्मकुंडली में 6, 8, 12 स्थानों को खराब माना जाता है। इसलिए अगर लग्नेश, भाग्येश, नवमेश, लाभेश और धनेश केंद्र या त्रिकोण में हों, तो कुंडली में अच्छा योग बन जाता है। अगर कोई अच्छा ग्रह नवम में हो, तो अच्छा फल देता है। चंद्रमा पक्ष बली हो और उस पर किसी पापी ग्रह का प्रभाव नहीं हो, तो जन्मपत्री में बहुत ही शक्ति आ जाती है। कुंडली में चंद्रमा की स्थिति बहुत अच्छी होने से आधी कुंडली स्वतः ही शुभ है और खराब होने से अशुभ होती है। जन्मकुंडली देखते समय लग्न, चंद्र लग्न और सूर्य लग्न तीनों का विचार करना चाहिए। लग्न शरीर है, चंद्रमा मन और दिमाग है और सूर्य का संबंध आत्मा से है अर्थात सूर्य आत्मा है। अगर तीनों की स्थिति अच्छी हो, तो जातक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल या मुख्यमंत्री अथवा आइ. ए. एस या आइ. पी. एस. अधिकारी हो सकता है। और सुख सुविधा की हर चीज प्राप्त हो सकती है। जन्मपत्री में लग्न, चंद्र लग्न और सूर्य लग्न के अनुरूप संपूर्ण कंुडली अपना फल करती है, इन तीनों को कुंडली में केंद्र बिंदु माना जाता है। इसलिए अगर सूर्य लग्न के दोनों तरफ शुभ ग्रह आ जाते हैं या सूर्य से छठे और आठवें घरों में शुभ ग्रह स्थित होते हैं, तो सूर्य लग्न के दोनों तरफ शुभ मध्यत्व पड़ने के कारण सूर्य लग्न बलवान होता है। यही स्थिति यदि लग्न और चंद्र के दोनों तरफ हो, तो वे भी बली होते हैं। लेकिन चंद्रमा को देखते समय उसके पक्ष बल पर ध्यान देना जरूरी है। अगर चंद्रमा पक्ष में दुर्बल हो, तो उसकी शक्ति बहुत कम हो जाती है। इसलिए चंद्र लग्न के दोनों तरफ सूर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि जब सूर्य चंद्रमा के नजदीक आ जाता है तब चंद्रमा पक्ष में दुर्बल हो जाता है। सूर्य की शनि, राहु और केतु के साथ युति होने पर या इनकी दृष्टि में होने पर सूर्य अशुभ हो जाता है और बड़ी सीमा तक अपना अच्छा फल नहीं दे पाता। उसी तरह चंद्रमा शनि, राहु और केतु के साथ या इनकी दृष्टि में होने पर बहुत ही कमजोर हो जाता है और धन का नुकसान करता है। लग्नेश जब पापी ग्रहों की युति या दृष्टि में आ जाता है, तो जातक बहुत ही कम पैसे कमा पाता है। उपाय: लग्नेश और भाग्येश का रत्न धारण करने से हर प्रकार की परेशानी से छुटकारा मिलता है और परिणाम 35 प्रतिशत अच्छा मिलता है।
ऐसे लोग जीवनभर कमाते हैं पैसा
धन... पैसा... मनी... यह ऐसे शब्द हैं जिनके आगे पीछे दुनिया भाग रही है। अमीर और अमीर बनना चाहते हैं जबकि गरीब थोड़ा पैसा कमाने के लिए ही दिनरात मेहनत करते हैं फिर भी भाग्य साथ नहीं देता। कोई गरीब क्यों होता है और किसी अमीर के पास कितना पैसा होगा? यह ज्योतिष शास्त्र से जाना जा सकता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म पत्रिका का दूसरा भाव धन या पैसों से संबंधित होता है। इसी दूसरे भाव से व्यक्ति को धन, आकर्षण, खजाना, सोना, मोती, चांदी, हीरे, जवाहारात आदि मिलते हैं। साथ ही इसी से व्यक्ति को स्थायी संपत्ति जैसे घर, भवन-भूमि का कारक भी प्राप्त होता है।
- किसी की कुंडली में द्वितीय भाव पर शुभ ग्रह या शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो उस व्यक्ति के अमीर बनने में कोई रूकावट नहीं होती है।
- यदि कुंडली में द्वितीय भाव में बुध हो तथा उस पर चंद्रमा की दृष्टि हो तो जातक धनहीन होता है वह जीवनभर मेहनत करते रहता हैं परंतु उसे ज्यादा धन की प्राप्ति नहीं होती है। वह गरीब ही रहता है।
- यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में द्वितीय भाव पर किसी पाप ग्रह की दृष्टि हो तो वह धनहीन होता है।
- यदि कुंडली के द्वितीय भाव में चंद्रमा हो तो अपार धन प्राप्ति का योग बनता है परंतु यदि उस पर नीच के बुध की दृष्टि पड़ जाए तो घर में भरा हुआ धन भी नष्ट हो जाता है।
- चंद्रमा यदि अकेला हो तथा कोई भी ग्रह उससे द्वितीय या द्वादश न हो तो व्यक्ति गरीब ही रहता है।
- यदि कुंडली में सूर्य, बुध द्वितीय भाव में स्थित हो तो धन स्थिर नहीं होता।
अधिक धन प्राप्ति के लिए यह उपाय करें:
- प्रतिदिन शिवलिंग पर जल, बिलपत्र और अक्षत (चावल) चढ़ाएं।
- महालक्ष्मी और श्री विष्णु की पूजा करें।
- सोमवार का व्रत करें।
- सोमवार को अनामिका उंगली में सोने, चांदी और तांबे से बनी अंगुठी पहनें।
- शाम को शिवजी के मंदिर में दीपक लगाएं।
- पूर्णिमा को चंद्र का पूजन करें।
- श्रीसूक्त का पाठ करें।
- श्री लक्ष्मीसूक्त का पाठ करें।
- कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
- किसी की बुराई करने से बचें।
- पूर्णत: धार्मिक आचरण बनाएं रखें।
- घर में साफ-सफाई बनाएं रखें इससे धन स्थाई रूप से आपके घर में रहेगा